राजेश पायलट आप आज भी मेरे साथ हो!



(आज उनकी बरसी है)


मैं दिल्ली में 'जागरण' का ब्यूरो चीफ हुआ ही था कि मैनेजिंग एडिटर सुनील गुप्ता ने कहा, 'राजेश पायलट मुझे दूसरों से बहुत अलग दिखता है.' ... कुछ ही दिन बाद संचार भवन से प्रेस कांफ्रेंस का बुलावा आया. मैंने सोचा, मैं खुद जाऊँगा. गया, तो पायलट ने जैसे पहचाना...'आप को कहाँ देखा है?'...चंडीगढ़ में कभी एक छोटी सी मुलाक़ात थी. बहरहाल, अगले दिन इटावा में एक उपचुनाव के सिलसिले में उनके साथ हेलीकाप्टर पे जाना हुआ. सलमान खुर्शीद और टाइम्स आफ इंडिया के अस्करी जैदी भी साथ थे.


वापसी में...बादल थे और बारिश भी... ऊपर पता नहीं कहाँ से पानी टपकने लगा...भीतर जहां इलेक्ट्रानिक्स का पैनल होता है उसके ऊपर. अस्करी अपना अखबार साथ लाये थे. उन ने ऊपर रख दिया ताकि कहीं कोई शार्ट सर्किट न होने पाए....लेकिन पानी कुछ ज्यादा ही टपकने लगा और चालक की जानकारी ये थी अभी और पंद्रह मिनट हेलीकाप्टर को बारिश में रहना था....सब की सिट्टी पिट्टी गुम...अखबार के कागज़ में दम ही कितना होता है. वो भीगा...गल गया....सब के चेहरों पे हवाइयां उड़ने लगीं. बूँदें धार बन टपकने लगीं थीं.


अचानक मेरे दिमाग में एक आइडिया आया. लैदर की जैकेट पहने था मैं. मैंने वो उतारी और लैदर वाला हिसा ऊपर रख, उसे कटोरीनुमा बना कर मैंने धार के नीचे रख दिया. कटोरा भर पानी रहा होगा जब बरसात वाले आकाश से हम निकले....काफी देर तक कोई कुछ नहीं बोला. हम दिल्ली पंहुचे....नीचे उतरे...पायलट साहब ने गले से लगा लिया...कहा...'आज के बाद ये जिंदगी तुम्हारी अमानत है.'...उसके बाद उनके भीतर के इंसान से बहुत दोस्ती रही. बहुत सी बातें हैं....वो फिर कभी....

राजेश पायलट आप आज भी मेरे साथ हो!

 

-जगमोहन

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tributes  

Posted On
Jun 11, 2012
Posted By
r.k.sharma
0 dada kuchh bhi likholajawab hi hota hai. dil choo lete ho aap. kafi logon ko padha hai,aur kafi ko roj padhta hoon lekin wo baat nahin jo aapke lekhan mein hai. chahe story ho, chahe sansmaran shuru karne ke baad beech mein chhodna bahut mushkil hota hai. kash aaj ke so called reporter aapke lekhan se kuchh prerna lein.

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